Tuesday, 20 February 2018

बांग्लादेश : धर्मांधों ने पहले मंदिर की ५ मूर्तियों की तोडफोड की फिर उसे आग के हवाले किया

Tuesday, February 20, 2018



  • कहां अपने प्रार्थनास्थल को गिराए जाने के विरुद्ध संगठित होनेवाले पूरे विश्‍व के अन्य पंथीय, तो कहां केवल इस्लामिक राष्ट्र बांग्लादेश एवं पाकिस्तान में हीं नहीं, अपितु भारत के हिन्दुआें के साथ किए जानेवाले अन्याय के विरुद्ध भी संगठित न होनवाले निद्रिस्त जन्महिन्दू !
  • पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में रहनेवाले हिन्दुआेंपर निरंतर आघात किए जा रहे हैं; परंतु भारत सरकार इस विषय में एक शब्द भी नहीं बोलती, इसे ध्यान में लीजिए । पूरे विश्‍व के हिन्दुआें की रक्षा के लिए अब हिन्दू राष्ट्र ही चाहिए !
ढाका : एक बार फिर से इस्लामिक देश बंगलादेश में नौखाली जिले के उत्तर महम्मदपुर गांव में धर्मांधों ने वहां के श्री कालीमाता मंदिर में स्थित ५ मूर्तियों की तोडफोड की और वहां के लकडी से बने मखर को आग लगाकर मंदिर भी जलाया । इससे मंदिर को बहुत बडी हानि पहुंची है । बांग्लादेश का हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन बांग्लादेश माईनॉरिटी वॉच के प्रमुख अधिवक्ता रवींद्र घोष ने यह जानकारी दी ।
अधिवक्ता रवींद्र घोष ने आगे कहा, ‘‘ यह मामला तब सामने आया जब नियमितरूप से मंदिर की स्वच्छता के लिए गईं श्रीमती लोनी बाला दास दूसरे दिन सुबह मंदिर पहुंची । जला हुआ मंदिर देख उन्होने शोर मचाया चिसके बाद परिसर के हिन्दू वहां इकट्ठा हुए ।
मंदिर में सेवा करनेवाले श्री. मोलोय बिश्‍वास ने इस प्रकरण में सेनबाग पुलिस थाने में परिवाद पंजीकृत किया । पुलिसकर्मियों ने घटनास्थल का अवलोकन कर जांच आरंभ की । अभीतक किसी भी संदिग्ध को बंदी नहीं बनाया गया है । बांग्लादेश माईनॉरिटी वॉच को इस घटना की जानकारी मिलते ही अधिवक्ता घोष ने सेनबाग पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक से संपर्क किया । उन्होंने इन घटना का संज्ञान लिए जाने की जानकारी देकर घटना की जांच का आश्‍वासन दिया । इस घटना के कारण स्थानीय हिन्दू डरे हुए है ।
अधिवक्ता रवींद्र घोष द्वारा इस घटना के लिए उत्तरदायी अपराधियों को तुरंत बंदी बनाकर उनको कठोर दंड देने की मांग की और बांग्लादेश में हिन्दुआें के मंदिरोंपर आक्रमण की बढती घटनाआें के विषय में चिंता व्यक्त कर वहां के शासन से अल्पसंख्य हिन्दुआें के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया ।

Wednesday, 7 February 2018

Monday, 4 December 2017

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई आज से, 5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला

Monday, December 4, 2017

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई आज से, 5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवादित ढांचा गिराये जाने की 25वीं वर्षगांठ से एक दिन पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद पर आज (5 दिसंबर) से अंतिम सुनवाई शुरू होने की संभावना है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय विशेष पीठ चार दीवानी मुकदमों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 अपीलों पर सुनवाई करेगी.
हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा था
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था.
इस बीच, उत्तर प्रदेश के सेन्ट्रल शिया वक्फ बोर्ड ने इस विवाद के समाधान की पेशकश करते हुये न्यायालय से कहा था कि अयोध्या में विवादित स्थल से 'उचित दूरी' पर मुस्लिम बहुल्य इलाके में मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है.
1992 को गिराया गया था विवादित ढ़ांचा
हालांकि, शिया वक्फ बोर्ड के इस हस्तक्षेप का अखिल भारतीय सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विरोध किया. इसका दावा है कि उनके दोनों समुदायों के बीच पहले ही 1946 में इसे मस्जिद घोषित करके इसका न्यायिक फैसला हो चुका है जिसे छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया गया था. यह सुन्नी समुदाय की है.
हाल ही में एक अन्य मानवाधिकार समूह ने इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुये शीर्ष अदालत में एक अर्जी दायर की और इस मुद्दे पर विचार का अनुरोध करते हुये कहा कि यह महज संपत्ति का विवाद नहीं है बल्कि इसके कई अन्य पहलू भी है जिनके देश के धर्म निरपेक्ष ताने बाने पर दूरगामी असर पडेंगे.
योगी सरकार ने अंग्रेजी में पेश की दलीलें
शीर्ष अदालत के पहले के निर्देशों के अनुरूप उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन दस्तावेज की अंग्रेजी अनुदित प्रति पेश कर दी हैं जिन्हें वह अपनी दलीलों का आधार बना सकती है. ये दस्तावेज आठ विभिन्न भाषाओं में हैं.
दोनों पक्षों से है वकीलों की फौज
भगवान राम लला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण और सी एस वैद्यनाथन तथा अधिवक्ता सौरभ शमशेरी पेश होंगे और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता पेश होंगे.
अखिल भारतीय सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाडे़ का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अनूप जार्ज चौधरी, राजीव धवन और सुशील जैन करेंगे.
यूपी सरकार से मांगी गई थी विवाद के साक्ष्यों से जुड़े दस्तावेज
शीर्ष अदालत ने 11 अगस्त को उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि 10 सप्ताह के भीतर हाई कोर्ट में मालिकाना हक संबंधी विवाद में दर्ज साक्ष्यों का अनुवाद पूरा किया जाये. न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि वह इस मामले को दीवानी अपीलों से इतर कोई अन्य शक्ल लेने की अनुमति नहीं देगा और उच्च न्यायालय द्वारा अपनाई गयी प्रक्रिया ही अपनायेगा.
इनपुट: भाषा
Source : ZeeNews

Sunday, 3 December 2017

राममंदिर निर्माण को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

Sunday, December 3, 2017

राममंदिर निर्माण को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि हमारी निगाह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आपसी सहमति के आधार पर मामले के सर्वमान्य हल पर लगी है।
हरिद्वार, [जेएनएन]: संतों को अयोध्या में राममंदिर निर्माण को 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में शिया वफ्फ बोर्ड की ओर से अयोध्या में राममंदिर निर्माण और इसके बदले लखनऊ में मस्जिद निर्माण के दिए प्रस्ताव पर सुनवाई पर है। इसके तुरंत बाद अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए संतों की गंभीर कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इसकी पुष्टि की। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि हमारी निगाह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आपसी सहमति के आधार पर मामले के सर्वमान्य हल पर लगी है। 
 उन्होंने कहा हरिद्वार में विहिप केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की जून में हुई बैठक में लिए निर्णय के अनुसार ही अखाड़ा परिषद और संत इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। महंत नरेंद्र गिरि शनिवार को दैनिक जागरण से फोन पर बातचीत कर रहे थे। 
Source : .jagran.com

अयोध्या विवाद: कारसेवकों पर गोली कांड की भी सुनवाई पांच दिसंबर को

Saturday, December 2, 2017

अयोध्या विवाद: कारसेवकों पर गोली कांड की भी सुनवाई पांच दिसंबर को

Top stories-03-12-2017

अयोध्या विवाद: कारसेवकों पर गोली कांड की भी सुनवाई पांच दिसंबर को

नई दिल्ली, [माला दीक्षित]। अयोध्या मे 1990 में कार सेवकों पर गोली चलाने के मामले मे यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट 5 दिसंबर को सुनवाई करेगा। यह मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली उसी पीठ के सामने सुनवाई के लिए लगा है, जिसमें राम जन्मभूमि वाला केस लगा है।

राणा संग्राम सिंह ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुलायम सिंह के 2014 में एक जनसभा में दिए गए बयान को आधार बनाया है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहली बार मंगलवार पांच दिसंबर को सुनवाई के लिए आ रही है।
दाखिल याचिका में कहा गया है कि 6 फ़रवरी 2014 को मैनपुरी जिले में आयोजित एक जनसभा में मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनके आदेश पर 1990 में पुलिस ने अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलाई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बयान के बाद उसने लखनऊ पुलिस में मुलायम सिंह के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने लखनऊ की निचली अदालत में मुलायम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन निचली अदालत ने याचिका ख़ारिज कर दी थी।

Source jagran